नसीरुद्दीन शाह: भारतीय सिनेमा के महान अभिनेता को सलाम
नसीरुद्दीन शाह: भारतीय सिनेमा के महान अभिनेता को सलाम

रंगमंच और सिनेमा दोनों में अपने जबरदस्त योगदान के लिए पहचाने जाने वाले शाह का करियर चार दशकों से भी अधिक समय तक फैला है। उनकी विविध भूमिकाएँ, गहराई भरे अभिनय और सच्चाई से जुड़ी कहानियों की पसंद ने उन्हें भारतीय सिनेमा का स्तंभ बना दिया है।

20 जुलाई 1950 को उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में जन्मे नसीरुद्दीन शाह ने अभिनय की दुनिया में कदम तब रखा, जब भारतीय सिनेमा बदलाव के दौर से गुजर रहा था। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा और फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) से प्रशिक्षण लेने के बाद, उन्होंने पद्धति अभिनय (method acting) को अपनाया और हमेशा अर्थपूर्ण, यथार्थपरक कहानियों का चयन किया।

शाह 1970 और 80 के दशक में शुरू हुए समांतर सिनेमा आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक बने। उनकी प्रारंभिक फिल्में जैसे निशांत (1975), मंथन (1976) और स्पर्श (1980) उनके संवेदनशील और गहराई से भरे अभिनय का प्रमाण हैं। स्पर्श में उन्होंने एक नेत्रहीन स्कूल प्रिंसिपल की भूमिका निभाई थी, जो भारतीय सिनेमा में अब तक की सबसे प्रभावशाली भूमिकाओं में गिनी जाती है।

मासूम (1983) में उनके अभिनय को विशेष सराहना मिली, जिसमें एक ऐसे पिता का किरदार था जो अपने नाजायज बेटे को स्वीकार करने की जद्दोजहद में है। वहीं जाने भी दो यारों (1983) ने साबित किया कि वह हास्य और व्यंग्य में भी उतने ही सक्षम हैं।

नसीरुद्दीन शाह ने कभी खुद को एक ही धारा तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने समानांतर सिनेमा के साथ-साथ मुख्यधारा की बॉलीवुड फिल्मों में भी जबरदस्त छाप छोड़ी। सरफ़रोश (1999), इक़बाल (2005) और  वेडनसडे (2008) जैसी फिल्मों में उनके किरदारों ने उन्हें नई पीढ़ी और व्यापक दर्शकों से जोड़ा।

फिल्मों के अलावा, वे एक बेहद सक्रिय रंगमंच कलाकार और निर्देशक भी हैं। उन्होंने 1979 में मॉटली थिएटर ग्रुप की स्थापना की और शेक्सपियर, सैमुअल बेकेट और भारतीय नाटककारों के नाटकों का मंचन किया। रंगमंच में उनका योगदान भी सिनेमा जितना ही महत्वपूर्ण है।

नसीरुद्दीन शाह एक बेबाक और विचारशील व्यक्तित्व हैं, जो कला, समाज और राजनीति पर खुलकर अपनी राय रखते हैं। उनकी आत्मकथा "And Then One Day" उनके जीवन और सोच को ईमानदारी से दर्शाती है।

आज जब वह 75 वर्ष के हो गए हैं, उनका प्रभाव पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है। उनके अभिनय, विचार और कला के प्रति समर्पण ने भारतीय सिनेमा को एक नई दिशा दी है।

जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ नसीर साहब कोएक सच्चे कलाकार, एक विद्वान अभिनेता और सच्चाई की आवाज़।

 

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