
जब भी भारतीय इंटरनेट कॉमेडी का ज़िक्र आता है, तो सबसे पहले एक ही नाम दिमाग में आता है—भुवन बाम। अपनी तीखी बुद्धिमानी, मज़ेदार किरदारों और ज़मीन से जुड़े अंदाज़ के साथ, भुवन बाम ने स्मार्टफोन पर वीडियो रिकॉर्ड करने से लेकर बॉलीवुड की दहलीज़ तक पहुँचने का लंबा सफ़र तय किया है। उनकी कहानी केवल एक लड़के के सपनों के पूरे होने की नहीं है, बल्कि इस बात की भी है कि कैसे डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स भारतीय मनोरंजन को बदल रहे हैं।
शुरुआती चिंगारी
भुवन बाम की शुरुआत बहुत साधारण थी। 1994 में दिल्ली में जन्मे भुवन को न तो बॉलीवुड हीरो बनने का सपना था और न ही यूट्यूबर बनने का। दरअसल, उनका पहला प्यार संगीत था। वे छोटे–मोटे कैफ़े और बार में गाना गाते और थोड़ी बहुत कमाई करते थे। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था।
2015 में उन्होंने जिज्ञासा और रचनात्मकता के चलते एक छोटा वीडियो अपलोड किया, जिसमें उन्होंने दिखाया कि कैसे टीवी पत्रकार किसी त्रासदी के समय असंवेदनशील हो सकते हैं। यह वीडियो वायरल हो गया और भुवन को अपना खुद का यूट्यूब चैनल BB Ki Vines शुरू करने की प्रेरणा मिली। जो एक मज़ाकिया प्रयोग के रूप में शुरू हुआ, वह देखते ही देखते एक सांस्कृतिक सनसनी बन गया।
BB Ki Vines: एक डिजिटल क्रांति
BB Ki Vines की खासियत इसकी सादगी थी। भुवन ने एक काल्पनिक दुनिया बनाई जिसमें सारे किरदार—टीटू मामा, समीर फुद्दी, बंछो आदि—खुद उन्होंने ही निभाए। हर किरदार अलग था और उनकी रोज़मर्रा की बातचीत भारतीय मध्यमवर्गीय जीवन की झलक दिखाती थी।
चमक-दमक वाले टीवी शो के विपरीत, भुवन के वीडियो सच्चे, सीधे और तुरंत जुड़ने वाले थे। वे इन्हें अक्सर अपने बेडरूम में मोबाइल के फ्रंट कैमरे से शूट करते थे। फिर भी, लाखों लोगों को इनमें अपने या अपने दोस्तों की झलक दिखाई देती थी। यही जुड़ाव और हाज़िरजवाबी ने BB Ki Vines को भारत की शुरुआती बड़ी यूट्यूब सफलता बना दिया।
धीरे-धीरे उनके सब्सक्राइबर करोड़ों में पहुँच गए। आज BB Ki Vines केवल एक चैनल नहीं है—यह अरबों व्यूज़ के साथ एक साम्राज्य है। इसने युवाओं को एक नया तरह का सितारा दिया: ऐसा स्टार जो टीवी या फ़िल्म स्टूडियो ने नहीं बनाया, बल्कि जिसने अपने दर्शकों के प्यार से खुद अपना करियर खड़ा किया।
कॉमेडी से आगे: कहानीकार का उदय
हालाँकि कॉमेडी ने उन्हें लोकप्रिय बनाया, लेकिन भुवन केवल उसी तक सीमित नहीं रहना चाहते थे। वे मूल रूप से एक कहानीकार हैं। इसी चाह ने उन्हें धिंडोरा वेब सीरीज़ बनाने के लिए प्रेरित किया, जिसमें उन्होंने एक बार फिर कई किरदार निभाए और उन्हें एक सशक्त कहानी में पिरोया। इस शो ने साबित किया कि वे केवल छोटे स्केच ही नहीं, बल्कि लंबे और गहरे कथानक भी संभाल सकते हैं।
इसके बाद उन्होंने ताज़ा ख़बर की, जो एक फैंटेसी–कॉमेडी सीरीज़ थी। इसमें उन्होंने एक सफाईकर्मी की भूमिका निभाई जिसे अलौकिक शक्तियाँ मिल जाती हैं। इस सीरीज़ ने दर्शकों को चौंका दिया और उनकी अभिनय क्षमता को साबित किया। यही शो उनके लिए मुख्यधारा बॉलीवुड का दरवाज़ा भी खोल गया।
बॉलीवुड की दस्तक
2025 में भुवन का बॉलीवुड सपना आकार लेने लगा। उन्होंने अपनी पहली फ़िल्म कुकू की कुंडली की घोषणा की, जिसे खुद करण जौहर प्रोड्यूस कर रहे हैं—एक ऐसे निर्देशक जो नए टैलेंट लॉन्च करने के लिए मशहूर हैं। इस फ़िल्म में उनके साथ अभिनेत्री वामीका गब्बी भी नज़र आएँगी।
भुवन के लिए यह सिर्फ़ पर्दे पर अभिनय करने का मौक़ा नहीं है। यह इस बात को साबित करने का मौका है कि डिजिटल कलाकार भी मुख्यधारा के सितारों के बराबर खड़े हो सकते हैं। इंटरव्यू में उन्होंने माना है कि वे घबराए हुए हैं, लेकिन उम्मीदों से भरे भी हैं। आखिरकार, यह स्मार्टफोन की स्क्रीन से सिनेमाघरों के बड़े परदे तक की छलांग है। और अगर कोई इस जोखिम को उठाने की हिम्मत दिखा सकता है, तो वह भुवन बाम ही हैं।
सिर्फ़ शोहरत से आगे
भुवन की खासियत केवल उनकी प्रतिभा नहीं है, बल्कि उनकी सच्चाई भी है। शोहरत मिलने के बाद भी वे ज़मीन से जुड़े और सरल बने हुए हैं। वे अकसर खुले तौर पर बताते हैं कि रचनात्मकता और दबाव के बीच संतुलन बनाना कितना कठिन है, अनुशासन क्यों ज़रूरी है और वे अपने मंच का उपयोग जिम्मेदारी से करना चाहते हैं।
संगीत के प्रति उनका जुनून भी आज तक कायम है। वे समय-समय पर भावनात्मक गाने रिलीज़ करते हैं, जो उनके शुरुआती दिनों की याद दिलाते हैं। उनके गानों में अक्सर हास्य और भावना दोनों का मेल होता है—उनकी बहुआयामी शख्सियत का एक और सबूत।
भुवन बाम क्यों मायने रखते हैं
भुवन की यात्रा केवल उनकी अपनी नहीं है, बल्कि भारत के मनोरंजन जगत के बदलाव की प्रतीक है। दस साल पहले कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था कि एक यूट्यूबर बॉलीवुड में कदम रखेगा। लेकिन आज भुवन इस बात का सबूत हैं कि अगर प्रतिभा को दृढ़ता और ईमानदारी से पोषित किया जाए, तो वह पारंपरिक “गेटकीपर्स” को भी पार कर सकती है।
वे उस नई पीढ़ी के कलाकारों का हिस्सा हैं जो अपने लिए अवसर खुद बनाते हैं, जो इंटरनेट की भाषा बोलते हैं और जो सीधे दर्शकों से बिना किसी बिचौलिये के जुड़ते हैं।
आगे का रास्ता
जैसे ही भुवन बॉलीवुड में कदम रख रहे हैं, उनके प्रशंसकों की नज़रें उन पर टिकी हुई हैं। क्या वे बड़े पर्दे पर भी यूट्यूब जैसी सफलता दोहरा पाएँगे? क्या वे मुख्यधारा के अभिनेता बनकर भी एक क्रिएटर की जड़ों से जुड़े रह पाएँगे?
एक बात तो तय है—भुवन बाम पहले ही वो कर दिखा चुके हैं जिसे बहुत से लोग असंभव मानते थे। उन्होंने कल्पना, हास्य और जुड़ाव पर आधारित एक करियर बनाया है। चाहे स्केच हों, सीरीज़ हों, संगीत हो या फ़िल्में—उनका मकसद हमेशा यही रहा है कि लोग कुछ महसूस करें—हँसी, अपनापन या प्रेरणा।
और यही वजह है कि उनकी कहानी हमें छूती है। यह केवल एक इंसान की सफलता की दास्तान नहीं है। यह इस विश्वास की कहानी है कि रचनात्मकता कहीं से भी शुरू हो सकती है और आपको कहीं भी ले जा सकती है—यहाँ तक कि बॉलीवुड तक।
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भारतीय सिनेमा की विशाल और जीवंत दुनिया में कुछ ही सितारे उतने दीर्घकालिक और उज्ज्वल चमके हैं जितने धर्मेंद्र जिन्हें प्यार से बॉलीवुड का ही-मैन कहा जाता है। कई दशकों तक उन्होंने केवल अभिनेता के रूप में नहीं, बल्कि एक भावना, एक युग और अपने आप में एक संस्था के रूप में स्थान बनाया। छोटे शहर का एक सपने देखने वाला युवा जब इतिहास के सबसे प्रिय और सम्मानित सितारों में से एक बन गया, तो वह यात्रा समर्पण, विनम्रता और अद्वितीय प्रतिभा की मिसाल बन गई। पीढ़ियाँ आईं और चली गईं, पर धर्मेंद्र का आकर्षण कभी फीका नहीं पड़ा वह आज भी उतना ही उज्ज्वल है।
बप्पी लाहिड़ी, जिन्हें प्यार से बप्पी दा कहा जाता है, भारतीय संगीत इतिहास के सबसे प्रभावशाली और नवोन्मेषी संगीतकारों में से एक हैं। अपने पाँच दशकों से अधिक के करियर में उन्होंने बॉलीवुड को एक ऐसा आधुनिक, चंचल और ऊर्जा से भरा संगीत दिया, जिसे भारत ने पहले कभी अनुभव नहीं किया था। उनके गीत बदलते हुए भारत की उस धड़कन को पकड़ते थे, जो अधिक जीवंत, युवा और वैश्विक प्रभावों को अपनाने के लिए तैयार हो रहा था। आज भी, उनके निधन के वर्षों बाद, उनकी धुनें पीढ़ियों तक गूंजती हैं, जो उनकी प्रतिभा की अमरता साबित करती हैं।
हर साल 22 नवंबर को दुनिया भर के लाखों प्रशंसक एकत्रित होकर बॉलीवुड के सबसे प्रिय और बैंकेबल स्टार कार्तिक आर्यन का जन्मदिन मनाते हैं। ईमानदारी, कड़ी मेहनत और आकर्षक ऑन-स्क्रीन व्यक्तित्व से सजी उनकी फिल्मी यात्रा ने उन्हें युवा महत्वाकांक्षा, मध्यमवर्गीय दृढ़ता और सिनेमा की मोहक दुनिया का प्रतीक बना दिया है।
भारतीय सिनेमा को आकार देने वाले दिग्गजों की बात जब भी होती है, सलीम खान का नाम सबसे ऊपर आता है। आज बहुत-से लोग उन्हें सुपरस्टार सलमान खान के पिता के रूप में जानते हैं, लेकिन सलीम खान की खुद की बॉलीवुड यात्रा किसी प्रेरणा से कम नहीं है। वे उन दुर्लभ व्यक्तित्वों में से एक हैं जिन्होंने हिंदी सिनेमा की भाषा, अंदाज़ और कहानी कहने के तरीके को एक नई दिशा दी और कहानी लेखन के लिए नए मानक स्थापित किए।
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